2021 में होने वाली अगली जनगणना होगी डिजिटल, पेपर पेन से मिलेगी आजादी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (23 सितंबर) को कहा कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए 2021 की जनगणना मोबाइल ऐप के जरिए की जाएगी। शाह ने नई दिल्ली में भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय की नई इमारत की नींव रखने के बाद कहा कि राष्ट्रव्यापी जनगणना 16 भाषाओं में की जाएगी जिसपर 12,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना की संदर्भ तारीख एक मार्च 2021 होगी, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी होने के मद्देनजर यह दिनांक एक अक्टूबर 2020 होगी। ऐप में लोगों के पैन नंबर, वोटर कार्ड नंबर, आधार नंबर के भी डिटेल्स डाले जाएंगे।
शाह ने यह भी कहा कि जनगणना के साथ ही देश के सामान्य निवासियों के राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के लिए भी आंकड़े लिए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि एनपीआर असम के एनआरसी का राष्ट्रव्यापी संस्करण का आधार हो सकता है। शाह ने कहा, ‘‘जनगणना के आंकड़े मोबाइल ऐप के जरिए लिए जाएंगे। पहली बार जनगणना के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत कागज और कलम के जरिए की जाने वाली जनगणना से आगे बढ़ रहा है जिससे देश में जनगणना कवायद में बड़ी क्रांति आएगी।’’ गृह मंत्री ने जनगणना 2021 के संदर्भ में कहा कि आंकड़े देश की भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद करेंगे, खासकर, विकास योजना, कल्याणकारी योजना आदि और यह ‘जन भागीदारी’ की कवायद होगी।
शाह ने कहा, ‘‘भारत की कुल 130 करोड़ की आबादी को इसके फायदे के बारे में बताया जाना चाहिए। कैसे जनगणना के आंकड़े भविष्य की योजनाएं , विकास योजना और कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद कर सकते हैं। जनगणना के आंकड़े बहु आयामी होते हैं और राष्ट्र की उन्नति में अहम योगदान देते हैं।’’ गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जनगणना के आंकड़े वार्ड, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने जनगणना अधिकारियों से संजीदगी से यह काम करने की अपील की क्योंकि यह उनके लिए ‘पुण्य’ करने का एक मौका है जो राष्ट्र निर्माण में सहायक है।
गृह मंत्री ने बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर मोदी सरकार ने हर घर को बिजली का कनेक्शन, गैस कनेक्शन, सड़कों का निर्माण, गरीबों के लिए घर, शौचालय, बैंक खाते और बैंक शाखाएं खोलने समेत 22 कल्याणकारी योजनाएं बनाईं।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत की आबादी दुनिया की जनसंख्या का 17.5 फीसदी है लेकिन भौगोलिक क्षेत्र दुनिया के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ‘‘ जाहिर है कि आबादी की तुलना में भारत के पास सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं। इस असमानता के अंतर को पाटने के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी